आरटीआई अधिनियम के तहत लोक सूचना अधिकारी (PIO) पर जुर्माना: कब, क्यों और कैसे?

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सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 भारत के नागरिकों को सरकारी विभागों से जानकारी प्राप्त करने का सशक्त अधिकार देता है। इस अधिनियम की सफलता बहुत हद तक लोक सूचना अधिकारी (PIO) की ईमानदारी और दक्षता पर निर्भर करती है। लेकिन क्या होगा अगर एक PIO अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहता है? ऐसे में, RTI अधिनियम PIO पर जुर्माना लगाने का प्रावधान करता है।

लोक सूचना अधिकारी (PIO) पर जुर्माना कब लगता है?

RTI अधिनियम की धारा 20(1) उन परिस्थितियों को स्पष्ट करती है जिनके तहत केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) या राज्य लोक सूचना अधिकारी (SPIO) पर जुर्माना लगाया जा सकता है। यह जुर्माना केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) या राज्य सूचना आयोग (SIC) द्वारा लगाया जाता है। निम्नलिखित स्थितियों में PIO पर जुर्माना लग सकता है:

  • समय पर सूचना न देना: यदि PIO बिना किसी उचित कारण के, निर्धारित 30 दिनों (या जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में 48 घंटे) के भीतर जानकारी प्रदान करने में विफल रहता है।
  • आवेदन को दुर्भावनापूर्ण तरीके से अस्वीकार करना: यदि PIO ने बिना किसी वैध या उचित कारण के RTI आवेदन को अस्वीकार कर दिया हो।
  • जानबूझकर अधूरी, गलत या भ्रामक जानकारी देना: यदि PIO ने जानबूझकर ऐसी जानकारी दी हो जो अधूरी, असत्य या आवेदक को गुमराह करने वाली हो।
  • जानकारी नष्ट करना: यदि PIO ने मांगी गई जानकारी को नष्ट कर दिया हो, ताकि उसे उपलब्ध न कराया जा सके।
  • सूचना देने में बाधा डालना: यदि PIO ने किसी भी तरह से सूचना उपलब्ध कराने में बाधा डाली हो।

जुर्माने की राशि और प्रक्रिया क्या है?

धारा 20(1) के तहत, सूचना आयोग, यदि संतुष्ट हो कि PIO ने उपरोक्त में से कोई भी कार्य बिना उचित कारण के या दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया है, तो उस पर जुर्माना लगा सकता है।

जुर्माने की राशि:

  • PIO पर प्रतिदिन 250 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है, जब तक कि जानकारी प्रदान नहीं की जाती है या कारण नहीं बताया जाता है।
  • यह जुर्माना अधिकतम 25,000 रुपये तक हो सकता है।
  • यह जुर्माना PIO के वेतन से काटा जाता है और सरकारी खजाने में जमा किया जाता है, न कि सीधे आवेदक को।

जुर्माने की प्रक्रिया:

  1. प्रथम अपील: यदि PIO समय पर जानकारी नहीं देता है या अधूरी/गलत जानकारी देता है, तो आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास प्रथम अपील दायर कर सकता है।
  2. द्वितीय अपील/शिकायत: प्रथम अपील से संतुष्ट न होने पर, आवेदक केंद्रीय/राज्य सूचना आयोग के पास द्वितीय अपील या शिकायत दायर कर सकता है।
  3. सुनवाई: सूचना आयोग, द्वितीय अपील या शिकायत की सुनवाई के दौरान PIO के आचरण की जांच करता है।
  4. PIO को सुनवाई का अवसर: यह महत्वपूर्ण है कि PIO को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाए। हाल के न्यायिक निर्णयों (जैसे छत्तीसगढ़ और इलाहाबाद उच्च न्यायालय) ने स्पष्ट किया है कि PIO पर जुर्माना लगाने से पहले उसे एक अलग नोटिस देना और सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करना अनिवार्य है। केवल अपील का नोटिस पर्याप्त नहीं है।
  5. जुर्माना लगाना: यदि सुनवाई के बाद आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि PIO ने अपने कर्तव्यों का उल्लंघन किया है, तो वह जुर्माना लगा सकता है।

जुर्माने के अतिरिक्त अन्य दंड

जुर्माना लगाने के अलावा, RTI अधिनियम PIO के खिलाफ अन्य कार्रवाई का भी प्रावधान करता है:

  • अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश (धारा 20(2)): सूचना आयोग संबंधित लोक प्राधिकरण को PIO के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश कर सकता है।
  • क्षतिपूर्ति (धारा 19(8)(b)): आवेदक सूचना में देरी या इनकार के कारण हुई किसी भी क्षति या नुकसान के लिए लोक प्राधिकरण से क्षतिपूर्ति (compensation) की मांग कर सकता है। यह सीधे PIO से नहीं, बल्कि लोक प्राधिकरण से मांगी जाती है।
  • आपराधिक कार्यवाही: कुछ गंभीर मामलों में, जैसे यदि PIO आवेदक को धमकाता है (जैसा कि कुछ SERP परिणामों में बताया गया है, धारा 506 IPC के तहत), तो संबंधित कानूनी धाराओं के तहत आपराधिक कार्यवाही भी शुरू की जा सकती है।

आवेदक के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

  • अपने RTI आवेदन और अपील के सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
  • PIO द्वारा दिए गए सभी जवाबों और पत्राचार का प्रमाण रखें।
  • यदि आपको लगता है कि PIO ने अधिनियम का उल्लंघन किया है, तो समय पर प्रथम और द्वितीय अपील दायर करें।
  • सूचना आयोग के समक्ष अपने मामले को स्पष्ट और तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत करें।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि PIO पर जुर्माना लगाना सूचना आयोग का विवेकाधिकार है और यह PIO के जानबूझकर या लापरवाही भरे आचरण पर निर्भर करता है। यह प्रावधान RTI अधिनियम को मजबूत बनाता है और सार्वजनिक अधिकारियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।

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