आरटीआई के तहत ‘थर्ड पार्टी इंफॉर्मेशन’ (Third-Party Information) मांगने के क्या नियम हैं?

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आरटीआई के तहत ‘थर्ड पार्टी इंफॉर्मेशन’ (Third-Party Information) मांगने के क्या नियम हैं?

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act, 2005) हर भारतीय नागरिक को सरकारी विभागों से जानकारी मांगने का अधिकार देता है। लेकिन जब बात ऐसी जानकारी की आती है, जो किसी ‘थर्ड पार्टी’ (किसी तीसरे व्यक्ति या संस्था) से जुड़ी हो, तो इसके नियम थोड़े अलग और विशेष होते हैं। इसे ‘थर्ड पार्टी इंफॉर्मेशन’ कहा जाता है। अक्सर लोगों को यह समझने में परेशानी होती है कि ऐसी जानकारी कैसे मांगी जाए और इसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस लेख में, हम आरटीआई के तहत थर्ड पार्टी इंफॉर्मेशन मांगने के नियमों को सरल भाषा में समझेंगे।

आरटीआई में ‘थर्ड पार्टी’ कौन है? (धारा 2(n))

आरटीआई अधिनियम की धारा 2(n) ‘थर्ड पार्टी’ को स्पष्ट करती है। इसके अनुसार, ‘थर्ड पार्टी’ का मतलब आवेदक और जन प्राधिकरण (Public Authority) के अलावा कोई भी व्यक्ति या संस्था है। उदाहरण के लिए, अगर आप किसी सरकारी अधिकारी के प्रमोशन, ट्रांसफर, या संपत्ति से जुड़ी जानकारी मांगते हैं, तो वह अधिकारी ‘थर्ड पार्टी’ होगा। इसी तरह, अगर आप किसी कंपनी के बारे में जानकारी मांगते हैं, जिसने सरकार के साथ कोई डील की है, तो वह कंपनी ‘थर्ड पार्टी’ मानी जाएगी।

थर्ड पार्टी इंफॉर्मेशन मांगने की प्रक्रिया और ज़रूरी नियम

जब आरटीआई आवेदन के माध्यम से थर्ड पार्टी से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है, तो जन सूचना अधिकारी (PIO) या सहायक जन सूचना अधिकारी (APIO) को धारा 11 के तहत एक विशेष प्रक्रिया का पालन करना होता है:

  1. CPIO/SPIO की प्रारंभिक जांच

    जब आपको कोई आरटीआई आवेदन मिलता है जिसमें थर्ड पार्टी की जानकारी मांगी गई है, तो CPIO/SPIO (केंद्रीय/राज्य जन सूचना अधिकारी) को पहले यह जांच करनी होती है कि क्या इस जानकारी के खुलासे से किसी थर्ड पार्टी के हितों को नुकसान पहुंच सकता है। यदि ऐसा लगता है कि जानकारी संवेदनशील है या थर्ड पार्टी के हितों से जुड़ी है, तो अगली प्रक्रिया शुरू की जाती है।

  2. थर्ड पार्टी को नोटिस

    आपके आरटीआई आवेदन मिलने के 5 दिनों के भीतर, CPIO/SPIO को उस थर्ड पार्टी को लिखित नोटिस भेजना अनिवार्य है जिसकी जानकारी मांगी गई है। इस नोटिस में यह बताना होता है कि आवेदक ने क्या जानकारी मांगी है और सार्वजनिक प्राधिकरण का इरादा उस जानकारी को जारी करने का है। थर्ड पार्टी को अपनी आपत्ति दर्ज करने के लिए 10 दिनों का समय दिया जाता है।

    क्या आप जानते हैं? इस नोटिस में यह भी लिखा होता है कि थर्ड पार्टी अपनी आपत्तियों के समर्थन में लिखित या मौखिक रूप से बयान दे सकती है।

  3. थर्ड पार्टी का जवाब और उस पर विचार

    थर्ड पार्टी को नोटिस मिलने के 10 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियां दर्ज करानी होती हैं। CPIO/SPIO थर्ड पार्टी द्वारा दी गई आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करता है। उन्हें यह देखना होता है कि क्या थर्ड पार्टी के हित इतने महत्वपूर्ण हैं कि जानकारी को सार्वजनिक न किया जाए।

  4. जानकारी देने या रोकने का अंतिम निर्णय

    थर्ड पार्टी के जवाब पर विचार करने के बाद, CPIO/SPIO जानकारी देने या उसे रोकने का अंतिम निर्णय लेता है। यह निर्णय आरटीआई आवेदन मिलने के 40 दिनों के भीतर लेना होता है (सामान्य 30 दिन + थर्ड पार्टी को नोटिस और जवाब के लिए 10 दिन)। CPIO/SPIO को अपने निर्णय की सूचना आवेदक और थर्ड पार्टी दोनों को देनी होती है।

  5. अपील का अधिकार

    यदि CPIO/SPIO जानकारी देने का निर्णय लेता है, तो थर्ड पार्टी को इस निर्णय के खिलाफ प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (First Appellate Authority) के पास 30 दिनों के भीतर अपील करने का अधिकार होता है। इसी तरह, यदि आवेदक को जानकारी नहीं मिलती है या वह आंशिक जानकारी से संतुष्ट नहीं है, तो वह भी प्रथम अपील दायर कर सकता है।

  6. जानकारी का खुलासा

    यदि जानकारी देने का निर्णय लिया जाता है और थर्ड पार्टी कोई अपील नहीं करती या उसकी अपील खारिज हो जाती है, तो जानकारी आमतौर पर प्रथम अपील की अवधि (30 दिन) समाप्त होने के बाद या अपील खारिज होने के बाद आवेदक को प्रदान की जाती है।

किन स्थितियों में थर्ड पार्टी इंफॉर्मेशन दी जा सकती है और किनमें नहीं?

जानकारी दी जा सकती है:

  • यदि जन सूचना अधिकारी या अपीलीय प्राधिकारी को लगता है कि मांगी गई जानकारी का सार्वजनिक हित (Public Interest) थर्ड पार्टी के निजी हितों से अधिक महत्वपूर्ण है, तो जानकारी जारी की जा सकती है। यह अक्सर भ्रष्टाचार, बड़े घोटालों या सरकारी कामकाज में पारदर्शिता से जुड़े मामलों में होता है।

जानकारी नहीं दी जा सकती है:

  • यदि जानकारी किसी थर्ड पार्टी का व्यापारिक रहस्य (commercial confidence), बौद्धिक संपदा (intellectual property) या गोपनीय जानकारी है, जिसके खुलासे से थर्ड पार्टी की प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान हो सकता है, और इस जानकारी को सार्वजनिक करने में कोई बड़ा सार्वजनिक हित नहीं है, तो इसे रोक दिया जा सकता है।
  • व्यक्तिगत जानकारी, जिसके खुलासे से किसी व्यक्ति की निजता का अनावश्यक उल्लंघन होगा, तब तक नहीं दी जाएगी जब तक इसमें कोई बड़ा सार्वजनिक हित शामिल न हो।
  • आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (Section 8) में उल्लिखित अन्य छूटें भी यहां लागू होती हैं, जैसे देश की सुरक्षा, विदेशी संबंध, आदि। आप आरटीआई एक्ट की धारा 8: वो जानकारियां जो आप नहीं मांग सकते (और क्यों!) लेख में इसके बारे में विस्तार से जान सकते हैं।

कुछ महत्वपूर्ण बातें और सावधानियां

  • कारण बताने की ज़रूरत नहीं: आरटीआई आवेदक को जानकारी मांगने का कोई कारण बताने की आवश्यकता नहीं है (धारा 6(2))। हालांकि, CPIO/SPIO सार्वजनिक हित का मूल्यांकन करते समय परिस्थितियों पर विचार कर सकता है।
  • सही CPIO का चुनाव: सुनिश्चित करें कि आप अपना आवेदन सही जन सूचना अधिकारी को भेज रहे हैं, जिसके पास वांछित जानकारी है या होनी चाहिए।
  • अपील का सहारा: यदि आपको लगता है कि आपकी थर्ड पार्टी जानकारी का आवेदन गलत तरीके से खारिज किया गया है, तो आपके पास प्रथम और द्वितीय अपील दायर करने का अधिकार हमेशा है। आरटीआई आवेदन लिखते समय की जाने वाली सामान्य गलतियों से बचें, ताकि आपका आवेदन सशक्त रहे।

निष्कर्ष

आरटीआई के तहत थर्ड पार्टी इंफॉर्मेशन प्राप्त करना थोड़ी जटिल प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन यह असंभव नहीं है। यदि आप नियमों और प्रक्रियाओं को समझते हैं, तो आप इस अधिकार का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकते हैं। याद रखें, आपका अधिकार पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए है, न कि किसी की निजी जानकारी का अनावश्यक उल्लंघन करने के लिए।

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